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PM: Today, the sun will not set on the community of Yoga practitioners

[vc_row][vc_column width="1/1"][vc_column_text]New Delhi: The Prime Minister, Shri Narendra Modi, today announced the arrival of a new Yoga era, with the first International Day of Yoga being observed across the world. Leading a mass yoga demonstration at Rajpath in New Delhi, the Prime Minister declared that today, as this day is observed in various parts of the world, the sun would not set on the community of Yoga practitioners. The Prime Minister said that today is not just the first-ever International Yoga Day, but the beginning of a new era that would inspire humanity in its quest for peace and harmony. The Prime Minister recalled the contribution of ancient sages, yoga gurus, and practitioners across the world through the ages, for making Yoga what it is, today. He said that as mankind advances in various spheres of development and technology, individual human beings must progress too, and Yoga offered an avenue for this. He said Yoga was not merely an exercise, but offered an opportunity for balancing the mind and body, and could help harness an individual's inner strength. The Prime Minister acknowledged all countries across the world who are observing International Yoga Day today, and the 177 countries which co-sponsored the resolution in the United Nations, for adopting June 21st as International Yoga Day.  The Prime Minister later participated in a mass yoga demonstration at Rajpath. Y-2 Y-3 Text of PM’s address at the mass yoga demonstration event at Rajpath, on the occasion of First International Yoga Day
देशभर में और विश्‍वभर में योग से जुड़े हुए सभी महानुभाव आज कभी किसी ने सोचा होगा कि ये राजपथ भी योगपथ बन सकता है। UN के द्वारा आज अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस का आरम्‍भ हो रहा है। लेकिन मैं मानता हूं आज 21 जून से अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस से न सिर्फ एक दिवस मनाने का प्रारम्‍भ हो रहा है लेकिन शांति, सद्भावना इस ऊंचाइयों को प्राप्‍त करने के लिए, मानव मन को Training करने के लिए एक नए युग का आरम्‍भ हो रहा है। कभी-कभार बहुत-सी चीजों के प्रति अज्ञानतावश कुछ विकृतियां आ जाती हैं। सदियों से ये परम्‍परा चली है, कालक्रम में बहुत सी बातें उसमें जुड़ी हैं। मैं आज ये कहना चाहूंगा कि सदियों से जिन महापुरूषों ने, जिन ऋषियों ने, जिन मुनियों ने, जिन योग गुरूओं ने, जिन योग शिक्षकों ने, जिन योग अभ्‍यासियों ने सदियों से इस परम्‍परा को निभाया है, आगे बढ़ाया है उसमें विकास के किंद-बिंदु जोड़े भी हैं। मैं आज पूरे विश्‍व के ऐसे महानुभावों को आदरपूर्वक नमन करता हूं और मैं उनका गौरव करता हूं। ये शास्‍त्र किस भू-भाग में पैदा हुआ, किस भू-भाग तक फैला, मैं समझता हूं मेरे लिए उसका ज्‍यादा महत्‍व नहीं है। महत्‍व इस बात का है कि दुनिया में हर प्रकार की क्रांति हो रही है। विकास की नई-नई ऊंचाइयों पर मानव पहुंच रहा है, technology एक प्रकार से मनुष्‍य जीवन का हिस्‍सा बन गई है, बाकी सब बढ़ रहा है। बाकी सब तेज गति से बढ़ रहा है, लेकिन कहीं ऐसा तो न हो कि इंसान वहीं का वहीं रह जाए। अगर इंसान वहीं का वहीं रह गया और विश्‍व में सारी की सारी व्‍यवस्‍थाएं विकसित हो गईं तो यह mismatch भी मानव जाति के लिए संकट का कारण बन सकता है और इसलिए आवश्‍यक है कि मानव का भी आंतरिक विकास होना चाहिए, उत्‍कर्ष होना चाहिए। आज विश्‍व के पास योग एक ऐसी विद्या है और जिसमें विश्‍व के अनेक भू-भागों के अनेक रंग वाले लोगों ने, अनेक परंपरा वाले लोगों ने अपना-अपना योगदान दिया है। उन सबका योगदान स्‍वीकार करते हुए अंतर्मन को कैसे विकसित किया जाए, अंतर–ऊर्जा को कैसे ताकतवर बनाया जाए, मनुष्‍य तनावपूर्ण जिंदगी से मुक्‍त हो करके शांति के मार्ग पर जीवन को कैसे प्रशस्‍त करे, ज्‍यादातर लोगों के दिमाग में योग, यानी एक प्रकार से अंग-मर्दन का कार्यक्रम है। मैं समझता हूं यह सबसे बड़ी गलती है। योग, यह अंग-उपांग मर्दन का कार्यक्रम नहीं है। अगर यही होता तो circus में काम करने वाले बच्‍चे योगी कहे जाते और इसलिए सिर्फ शरीर को कितना हम लचीला बनाते हैं, कितना मोड़ देते हैं, वो योग नहीं है। हमने कभी-कभार देखा है संगीत का बड़ा जलसा चलता हो और संगीत के जलसे के प्रारंभ में, जो वाद्य बजाने वाले लोग हैं वो अपने-अपने तरीके से ठोक-पीट करते रहते हैं। कोई तार ठीक करता है, कोई तबला ठीक करता है, कोई ढोल ठीक करता है, पांच मिनट-सात मिनट लगते हैं, तो जो दर्शक होता है उसको लगता है कि यार ये शुरू कब करेंगे, जिस प्रकार से संगीत शुरू होने से पहले ये जो ताल-ठोक का कार्यक्रम होता है और बाद में एक सुरीला संगीत निकलता है। ये ताल-ठोक वाला कार्यक्रम पूरे संगीत समारोह में बहुत छोटा होता है, ये आसन भी पूरी योग अवस्‍था में उतना ही उसका हिस्‍सा है। बाकी तो यात्रा बड़ी लंबी होती है और इसीलिए उसी को जानना और पहचानना आवश्‍यक हुआ है। और हम उस दिशा में ले जाने के लिए प्रयत्‍नरत हैं। मैं आज UNO का आभार व्‍यक्‍त करता हूं। दुनिया की 193 countries का आभार व्‍यक्‍त करता हूं, जिन्‍होंने सर्वसम्‍मति से इस प्रकार के प्रस्‍ताव को पारित किया और मैं उन 177 देशों का आभार व्‍यक्‍त करता हूं जिन्होंने co-sponsor बन करके योग के महत्व को स्‍वीकारा और आज सूरज की पहली किरण जहां से प्रारंभ हुई और चौबीस घंटे के बाद सूरज की आखिरी किरण जहां पहुंचेगी। सूरज की कोई भी किरण ऐसी नही होगी, सूरज की कोई यात्रा ऐसी नहीं होगी कि जिन्हें इन योग अभ्यासियों को आशीर्वाद देने का मौका न मिला हो। पहली बार दुनिया को यह स्‍वीकार करना होगा कि अब ये सूरज योग अभ्यासियों की जगह से कभी ढलता नही है वो पूरा चक्र जहां सूरज जाएगा, वहां-वहां योग अभ्यास मौजूद होगा। ये बात आज दुनिया में पहुँच चुकी है। मन, बुद्धि, शरीर और आत्‍मा ये सभी संतुलित हो, संकलित हो, सहज हो इस अवस्था को प्राप्त करने में योग की बहुत बड़ी भूमिका होती है। मै आज इस महान पर्व के प्रारंभ के समय, ये सिर्फ और सिर्फ मानव कल्याण का कार्यक्रम है, तनाव मुक्त विश्व का कार्यक्रम है, प्रेम, शांति, एकता और सद्भावना का कार्यक्रम है, संदेश पहुंचाने का कार्यक्रम है और इसे जीवन में उतारने का कार्यक्रम है। मैं इस कार्यक्रम के लिए हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। पूरे हिंदुस्‍तान में, हर गली-मोहल्‍ले में जो योग का माहौल बना है, उस माहौल को हम निरंतर आगे बढ़ाएंगे। इसी एक अपेक्षा के साथ आप सभी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
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About Sanjay Trivedi

Sanjay Trivedi is honorary editor of Asia Times. He is senior Indian Journalist having vast experience of 25 years. He worked in Janmabhoomi, Vyapar, Divya Bhaskar etc. newspapers and TV9 Channel as well as www.news4education.com. He also served as Media Officer in Gujarat Technological University.

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