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RO RO Ferry Service between Ghogha and Dahej inaugurated

  • The Prime Minister, Shri Narendra Modi inaugurated Phase 1 of the RO RO (Roll on, Roll off) ferry service between Ghogha and Dahej. This ferry service shall reduce the travel time between Ghogha in Saurashtra, and Dahej in South Gujarat, from about seven or eight hours, to just over an hour. Phase 1 enables passenger movement. When fully operationalized, this ferry service will also enable movement of vehicles.
  • The Prime Minister inaugurated the Sarvottam Cattle Feed Plant of Shree Bhavnagar District Cooperative Milk Producers Union Ltd. Addressing a large gathering on the occasion, the Prime Minister said that he is happy to be in Gujarat to personally convey new year greetings. He said that this programme, for the launch of a ferry between Ghogha and Dahej, is of vital importance for the entire nation. Noting that this ferry service is a first of sorts, the Prime Minister said it is a dream come true for people of Gujarat.
  • He said that the history of human civilisation illustrates the vitality of rivers and maritime trade. Gujarat is the land of Lothal; how can we forget these aspects of our history, he added. This programme is to bring back to life our glorious past; and connect Saurashtra with South Gujarat, the Prime Minister said. The Prime Minister said that people from these two regions frequently travel to and fro; and this ferry service will save a lot of time, as well as fuel.
  • The Prime Minister said that in the last three years, a lot of importance has been given to the development of Gujarat. He said Gujarat has a long coastline, and we should harness the opportunities that arise out of this. He said that steps have been taken in developing coastal infrastructure. This ferry service too, he added, would not be restricted to this one route. He said that other places too would be linked through ferries. He said the goal of the Union Government is to make the transport sector integrated, and state-of-the-art.
  • The Prime Minister travelled on the maiden voyage of this service, from Ghogha to Dahej. During this voyage, he was given a briefing about the ship, and the ferry service. He also interacted with divyangjan children on board the ship. Addressing a gathering in Dahej, the Prime Minister said that the Government's vision is ports for prosperity. India needs better ports and more ports, he added. Without proper connectivity, the economic development of a nation slows down, he asserted, adding that the Government has focused on port infrastructure. The Prime Minister mentioned the Government's stress on the blue economy, which he said is integral to the vision of a new India.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi being welcomed on stage at the public meeting in Ghogha, Gujarat on October 22, 2017.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi being welcomed on stage at the public meeting in Ghogha, Gujarat on October 22, 2017.
The Chief Minister of Gujarat, Shri Vijay Rupani and the Deputy Chief Minister of Gujarat, Shri Nitinbhai Patel are also seen.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi being welcomed on stage at the public meeting in Ghogha, Gujarat on October 22, 2017.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi inaugurating the Phase-I (Passenger Movement) of RORO ferry service between Ghogha and Dahej, in Bhavnagar, Gujarat on October 22, 2017.
The Chief Minister of Gujarat, Shri Vijay Rupani, the Minister of State for Road Transport & Highways, Shipping and Chemicals & Fertilizers, Shri Mansukh L. Mandaviya and the Deputy Chief Minister of Gujarat, Shri Nitinbhai Patel are also seen.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the gathering at the public meeting, in Ghogha, Bhavnagar, Gujarat on October 22, 2017.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi arrives at Ghogha Sea Ferry Point to mark the inauguration of Ghogha-Dahej Ro-Ro Ferry Service, in Gujarat on October 22, 2017.
The Chief Minister of Gujarat, Shri Vijay Rupani is also seen.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi on the maiden voyage of Ro-Ro Ferry Service between Ghogha and Dahej, in Gujarat on October 22, 2017.
The Chief Minister of Gujarat, Shri Vijay Rupani, the Minister of State for Road Transport & Highways, Shipping and Chemicals & Fertilizers, Shri Mansukh L. Mandaviya and the Deputy Chief Minister of Gujarat, Shri Nitinbhai Patel are also seen.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi on the maiden voyage of Ro-Ro Ferry Service between Ghogha and Dahej, in Gujarat on October 22, 2017.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi interacting with the children on the board, during his maiden voyage via Ghogha-Dahej Ro-Ro Ferry Service, in Gujarat on October 22, 2017.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi interacting with the divyangjan children at Dahej Sea Ferry Point after his maiden voyage via Ghogha-Dahej Ro-Ro Ferry Service, in Gujarat on October 22, 2017.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi interacting with the divyangjan children at Dahej Sea Ferry Point after his maiden voyage via Ghogha-Dahej Ro-Ro Ferry Service, in Gujarat on October 22, 2017.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi at the Public Meeting, to mark the inauguration of the Phase 1 of Ghogha-Dahej Ro-Ro Ferry Service, in Dahej, Gujarat on October 22, 2017.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the Public Meeting, to mark the inauguration of Phase 1 of Ghogha-Dahej Ro-Ro Ferry Service, in Dahej, Gujarat on October 22, 2017.

Excerpts of the PM’s address 

 
  • यहां उपस्थित विशाल संख्‍या में पधारे हुए मेरे प्‍यारे भाईयो और बहनों,
  • आप सबको दीपावली और नवीन वर्ष की शुभकामनाओं के साथ, अभी हम लोगों ने भाई दूज का त्‍यौहार मनाया नागपंचमी के त्‍यौहार का इंतजार कर रहे हैं और नये संकल्‍प के साथ, नये भारत, नये गुजरात के निर्माण की दिशा में आज एक अनमोल उपहार घोघा की धरती से पूरे हिन्‍दुस्‍तान को मिल रहा है। आज घोघा दहेज के बीच Ro-Ro ferry service का प्रथम चरण का शुभारंभ किया जा रहा है। ये भारत में अपनी तरह का पहला project है। यही दक्षिण पूर्वी एशिया का भी ये इतना बड़ा पहला project है। मैं गुजरात के लोगों को, यहां की सरकार को, 650 करोड़ रूपयों का ये project, अनेक आधुनिक तकनीक के साथ परिपूर्ण करने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इस project की शुरूआत के साथ साढ़े छ: करोड़ गुजरातियों का एक बहुत बड़ा सपना पूरा हुआ है। भाईयो बहनोअभी इस मंच से मुझे सर्वोत्‍तम डेयरी cattle feed plant के उद्घाटन का भी अवसर मिला है।
  • मेरे प्‍यारे भाईयो बहनों, एक विवाद का विषय है। क्‍या? मनुष्‍य जात ने सबसे पहले तैरना सीखा था कि पहिया बनाना सीखा था। कोई तय नहीं कर पाता था कि पहले पहिया बना कि पहले इंसान तैरना सीखा। लेकिन ये सही है कि मानव जात सदियों से तैर कर नांव से नदी पार करना उसने हमेशा सरल माना, आसान माना। गुजरात के हजारों साल का सामुद्रिक यात्रा का इतिहास रहा है। नांव बनती यहां थी। नाव लेकर दुनिया में जाकर लोगों की परंपरा थी। लोथल 84 देशों के झंडे यहां पर फहरते थे। फलफी यूनिवर्सिटी 1700 साल पहले अनेक देशों के बच्‍चे हमारे यहां फलफी यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे। लेकिन पता नहीं क्‍या हुआ सब कुछ इतिहस की तरह नीचे जमीन में दब गया। वो भी तो एक जमाना था।
  • भाईयो बहनों, आज का ये programme, आज का ये प्रारंभ घोघा, भावनगर, गुजरात के समुद्र तक के वो पुराने भव्‍य दिवसों को वापिस लाने का अवसर है। घोघा-दहेज के बीच से फेरी सर्विस सवा सौ दक्षिण गुजरात के करोड़ो लोगों की जिंदगी को न सिर्फ आसान बनाएगी बल्कि उन्‍हें और निकट ले आएगी। जिस सफर में 7-8 घंटे लगते थे। वो सफर एक सवा घंटे में पूरा किया जा सकेगा। हमारे यहां कहा जाता है सबसे मुल्‍यवान चीज समय होता है। time is money ये कहा जाता है। आज दुनिया में कोई 24 घंटे के, 25 घंटे नहीं कर सकता है। लेकिन ये भारत सरकार और गुजरात सरकार है कि आपके 24 घंटों में से एक घंटे की सफर करके, सात घंटे की सौगात दे सकता है। एक study कहती है कि सामान को ले जाने में अगर सड़क के रास्‍ते डेढ़ रूपये का खर्च होता है, तो उतना ही सामान ले जाने के लिए रेल के जरिये एक रूपया लगता है, लेकिन वही सामान अगर हम जलमार्ग से ले जाएं तो सिर्फ 20-25 पैसे में ले जा सकते हैं। आप सोच सकते हैं कि आपका कितना समय बचने जा रहा है। देश का कितना पेट्रोल डीजल बचने वाला है। वरना लाखों लीटर इंधन तो जब ट्रेफिक जाम हो जाता है, वहीं पर बरबाद हो जाता है।
  • भाईयो और बहनों, सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के बीच हर रोज लगभग 12 हजार लोग यात्रा करते हैं। पांच हजार से ज्‍यादा गाड़ियाँ हर रोज इन दो क्षेत्रों को connect करने के लिए सड़कों पर दौड़ती हैं। जब यही connectivity सड़क के बजाय समुद्र से होगी, तो 307 किलोमीटर की दूरी 31 किलोमीटर में बदल जाएगी। एक फेरी अपने साथ 500 से ज्‍यादा लोग, 100 के लगभग कारें, 100 के करीब ट्रकें ये अपने साथ लेकर के जा सकती है। साथियों जब ट्रेफिक का बड़ा हिस्‍सा इस फेरी सर्विस पर निर्भर हो जाएगा। या जब अपनी-अपनी गाड़ियाँ इधर से उधर ले जाएंगे। तो इसका प्रभाव दिल्‍ली और मुंबई को connect करने वाले रास्‍तों पर भी पड़ने वाला है। गुजरात के सबसे ज्‍यादा औद्योगिकरण वाले क्षेत्र जैसे दहेज, बड़ोदरा और उसके आस-पास के मार्गों पर गाडि़यों की संख्‍या कम होगी, गाडि़यों की रफ्तार बढ़ेगी और तेजी यहां के पूरे economy system को top-gear में ले जाएगी।
  • साथियों, हम पुरानी approach के साथ नए नतीजे प्राप्‍त नहीं कर सकते हैं। न ही पुरानी सोच के साथ नए प्रयोग किए जा सकते हैं। Ghogha-Dahej Ro-Ro ferry service इसका भी बहुत बड़ा उदाहरण है।
  • मैं जब मुख्‍यमंत्री बना और खोज खबर ली इस पर चर्चा की, तो कई दशकों से होकर रहे थे। लेकिन ये योजना पता नहीं किस कोने में पड़ी थी। अब जब मैं इसमें जाने लगा आगे बढ़ने लगा। मेरे आने के बाद मैं चाहता था तुरंत शुरू हो, आप हैरान हो जाएंगे कि सरकार ने ऐसी structural गलतियां की थी कि कभी Ro-Ro ferry service हो ही नहीं सकता। पुराने जमाने में क्‍या काम किया था इन्‍होंने? समस्‍या ये थी कि जिसे ferry चलानी थी, उसी से आग्रह किया जाता था कि तुम भी टर्मिनल बनाओ। क्‍या मुझे बताइये, रोड के उपर कोई बस दौड़ाता है, तो बस वाले को हम कहते हैं कि रोड बनाओं, बस वाले को कहते हैं कि बस स्‍टेशन बनाओ! एयर पोर्ट पर विमान आता है क्‍या मैं विमान वाले को कहता हूं कि एयरपोर्ट बनाओ? एयरपोर्ट सरकार बनाती हैं, बस स्‍टेशन सरकार बनाती हैं, रोड सरकार बनाती हैं। उस पर दौड़ने के लिए private लोग व्‍यापार के लिए आते हैं। Ro-Ro ferry service में उन्‍होंने कह दिया एक Jetty बनानी है, उसका पोर्ट बनाना है, आपको करना है तो करो ये समुद्र का किनारा है, ये पानी है आगे बढ़ो। कौन बढ़ेगा भाई? आखिरकर हमनें नीतिया बदली, पुरानी सरकारों के इस approach को हमने बदल दिया। हमने तय किया कि ferry service के लिए टर्मिनल बनाने का काम सरकार करेगी। टर्मिनल बन जाने के बाद उसका संचालन और ferry चलाने का काम private agency को दिया जाएगा। यहां के ‘रब’ समुद्र क्षेत्र में तलहाटी में जमीन मिट्टी भी बड़ी समस्‍या होती है। इस वजह से ferry को किनारे तक आने में दिक्‍कत होती है। बदली हुई रणनीति के तहत सरकार ने भी तय किया कि मिट्टी निकालने के लिए पत्‍थर हटाने के लिए dredging का काम भी, सरकार उसका खर्चा उठाएगी। हमने ये भी व्‍यवस्‍था बनाई कि इस सर्विस के बाद private agency को जो लाभ होगा, उसमें सरकार की भी भागीदारी होगी। ये नई रणनीति सफल रही। और इसी का परिणाम है कि Ghogha-Dahej के बीच Ro-Ro ferry service प्रारंभ हो रही है।
  • 2012 में मैं आया था। इसका शिलान्‍यास मैंने किया था। लेकिन तब समुद्र में कुछ काम करना है। तो हम जरा भारत सरकार पर dependent रहते थे। और भारत सरकार में ऐसे लोग बैठे थे उस समय, जब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था। वापी लेकर के कच्‍छ के मांडवी तक गुजरात के समुद्री तट पर विकास पर पूरा प्रतिबंध लगा दिया गया। हमारी सारी industries को पर्यावरण के नाम पर ताले लगाने की धमकियां दी गईं थी। मैं जानता हूं कितनी कठिनाईयों से हमने गुजरात को आगे बढ़ाने में सफलता पाई थी। लेकिन जब दिल्‍ली में आप सबने मुझे सेवा करने का मौका दिया एक के बाद एक समस्‍याएं सुलझती गईं। और आज Ro-Ro ferry service का लोकार्पण करने का प्रथम चरण का और ये project कठिन था। वरूण देव जी हमारी परीक्षा लेते रहे। लेकिन इतिहास गवाह है जब सेतू के निर्माण में किसी तरह की बाधा आई तो समुद्र मंथन में से ही अमृत भी निकल कर आया।
  • साथियों आज हमें वरूण देव की आर्शीवाद से ये अमृत मिला है। जो जलसेतू मिला है। मैं शीश झुकाकर के ये कामना करता हूं कि वरूण देव का आर्शीवाद हमेशा की तरह गुजरात के लोगों के साथ रहे। और आज जब हम आज ये Ro-Ro ferry service का प्रारंभ कर रहे हैं तब, मैं वीर मोखरा जी दादा को भी नमन करता हूं। और जैसे मेरे मछुवारे भाई बहन वीर मोखरा जी दादा को नरियल कराके करके आगे बढ़ते हैं। मैं भी उनकी परंपरा का आज पालन करूंगा। और वीर मोखरा जी के आर्शीवाद से हमारी यात्रियों की सुरक्षा बनी रहे। भावनगर और सौराष्ट्र, दक्षिण गुजरात के हिस्‍से की तरह आगे बढ़ जाएं, इतनी प्रगति हो और वीर मोखरा जी के आर्शीवाद हम पर बने रहेंगे, ये मुझे पूरा विश्‍वास है।
  • ये project इंजीनियरों और गुजरात सरकार दोनों के लिए ही एक बहुत बड़ी चुनौती था। इसलिए जो भी लोग इस परियोजना से जुड़े हैं, वे सब के सब बधाई के पात्र हैं।
  • भाईयो और बहनों, गुजरात में देश का सबसे बड़ा sea front उपलब्‍ध है। 1600 किलोमीटर से भी ज्‍यदा हमारा समुद्री तट है। सैंकड़ों वर्षों से गुजरात अपनी शक्ति और सामर्थ्‍य से पुरी दुनिया का ध्‍यान अपनी ओर खींचता रहा है। लोथल पोर्ट से निकली जानकारियां आज भी बड़े-बड़े marine experts को अचभिंत करती है। जिस जगह पर हम सभी उपस्थित हैं, वहां पर सैंकड़ों वर्षों से दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों से जहाज आते रहे हैं। इस समुद्र को विरासत समझते हुए, देखते हुए मैं उसी समय से गुजरात में port led development की बात कर रहा हूं। जब आपने मुझे मुख्‍यमंत्री के पद पर बिठाया। इसी को ध्‍यान में रखते हुए हमने गुजरात के coastal इलाके में Infrastructure और Development के दूसरे projects पर विशेष ध्‍यान दिया। हमने Ship-Building इसकी नई policy बनाई, Ship Building Park बनाए। Special Economic Zones में छोटे पोर्ट को बढ़ावा दिया जाए। Ship-breaking के नियमों में भी बढ़े बदलाव किए गए। सरकार ने Specialized Terminals के निर्माण पर भी विशेष जोर लगाया, जैसे दहेज में Solid Cargo, Chemical और LNG Terminal, मुंद्रा में Coal Terminal ऐसे Specialized Terminals से गुजरात के port-sector को एक नई दिशा, नई ऊर्जा और नई चेतना प्राप्‍त हुई है।
  • इसके साथ ही सरकार ने Vessel Traffic Management System और Ground Breaking Connectivity Project को भी विशेष रूप से बढ़ावा दिया। सरकार आने वाले दिनों में Maritime University बनाने और लोथल में Maritime Museum बनाने पर भी बहुत विस्‍तार से काम इन दिनों चल रहा है। इन सारे कार्यों के साथ ही यहां रहने वाले मेरे मछुवारे भाई बंघु और स्‍थानिय लोगों का विकास हो, इसके लिए सागर-खेड़ू विकास कार्यक्रम जैसी योजनाएं भी हम लगातार चला रहे हैं। इसी बात पर भी जोर दिया कि Shipping Industry में स्‍थानिय युवाओं को प्रशिक्षित करके उन्‍हें ही रोजगार दिया जाएगा।
  • उनकी शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, पीने के पानी, बिजली के साथ ही हमने Coastal Social Security का भी पूरा infrastructure तैयार किया।
  • भाईयो और बहनों, अभी हाल ही में जापान के प्रधानमंत्री आए थे। उस समय हमने जापान के साथ Shipping Sector को लेकर के एक महत्‍वपूर्ण समझौता किया। इस समझौते के तहत जापान सरकार और वहां की एक वित्‍तीय संस्‍था JAICA, Alang shipyard में up-gradation के लिए उसके modernization के लिए हमें वित्‍तीय सहयोग देंगे, हमें धन देंगे। इसके लिए वो तैयार हुए हैं।
  • साथियों, सरकार भावनगर से Alang-Sosiya Ship Recycling Yard तक के लिए एक alternative road भी उस पर भी काम कर रही है। एशिया के सबसे बड़े Ship Recycling Yard में 15 से 25 हजार कर्मचारी काम करते हैं। Alang-Sosiya Ship Recycling Yard भावनगर से करीब 50 किलोमीटर दूर है। अभी जो route उस पर काफी जाम की कितनी दिक्‍कत रहती है। मुझे लगता है वो मुझे बताने की जरूरत नहीं है। सरकर ने ये तय किया है Alang-Sosiya Ship Recycling Yard और मअुवा, पीपावाओ और जाफराबाद, वैरावल को जोड़ने वाला जो एक वैकिल्‍पक रूट है उसे चौड़ा किया जाएगा, upgrade किया जाएगा। भविष्‍य में Alang Yard की क्षमता भी बढ़ने जा रही है और उसे देखते हुए बीच सड़क का आधुनिकीकरण आवश्‍यक हो गया है। इस रूट से Ghogha-Dahej ferry service के लिए आ रही गाडि़यों को भी फायदा होने वाला है।
  • साथियों, सरकार के लगातार प्रयास का नतीजा है कि गुजरात के coastal आज इतनी तेजी से विकस हो रहा है। आज गुजरात पूरे देश में छोटे पोर्ट के जरिए होने वाले कुल cargo की आवाजाही का 32 प्रतिशत अकेला गुजरात handle करता है। यानि एक तिहाई गुजरात में होता है। इतना ही नहीं इस काम में पिछले 15 वर्षों में गुना बढ़ोतरी हुई है। मुझे उम्‍मीद है कि जिस तरह पिछले 15 साल में गुजरात ने अपने ports की क्षमता को भी चार गुना बढ़ाया है, cargo handling की रफ्तार भी और तेज होगी।
  • भाईयो और बहनों, गुजरात मार्ग की दृष्टि से बहुत ही strategic location पर है। यहां से दुनियां के किसी भी भू-भाग तक समुद्री मार्ग से पहुंचना बहुत ही आसान, सस्‍ता और सरल रास्‍ता है। हमें गुजरात की शक्ति का भरपूर फायदा उठाना चाहिए। गुजरात का maritime development भी पूरे देश के लिए एक model है। मुझे उम्‍मीद है कि Ro-Ro ferry service का पूरा project भी दूसरे राज्‍यों के लिए भी एक model project की तरह काम करेगा।
  • हमनें जिस तरह बरसों की मेहनत के बाद इस तरह के project में आने वाली दिक्‍कतों को समझा है, उन्‍हें दूर किया है। वो दिक्‍कतें कम से कम इसे दोहराने वालों राज्‍यों को कभी नहीं आएगी। इस ferry service से पूरे क्षेत्र में सामाजिक, आर्थिक विकास का एक नया दौर शुरू होगा। रोजगार के हजारों नये अवसर बनेगें। Coastal Shipping और Coastal Tourism का भी नया अध्‍याय आरंभ होगा। आने वाले दिनों में जब दिल्‍ली और मुबंई के बीच Dedicated Freight Corridor बन जाएगा और साथ ही दिल्‍ली-मुबंई Industrial Corridor का काम पूरा हो जाएगा तो इस सर्विस समेत गुजरात से जुड़े समुद्री मार्ग का महात्‍मय भी कई गुना बढ़ जाएगा। ये project अहमदाबाद और भावनगर के बीच के इलाकों में औद्योगिक विकास को एक करने के लिए बनाए गये Dholera special investment region (SIR) को भी एक नई मजबूती देने वाला है। Dholera SIR भारत ही नहीं विश्‍व के नक्‍शे पर विकसित होने वाला ये सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र होने वाला है। इससे लाखों लोगों के लिए नए रोजगार के अवसर बनेगें। गुजरात सरकार के प्रयास से Dholera में infrastructure से जुड़े काम तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। कुछ ही वर्षों में Dholera पूरी दुनिया में अपनी धाक जमाएगा और उसमें एक ही भूमि का, Ghogha -Dahej ferry service का भी योगदान होगा।
  • साथियों, भविष्‍य में हम इस ferry service को ये सिर्फ Ghogha-Dahej तक रूकने वाला नहीं है। भविष्‍य में हम इस ferry service को हम हजीरा, पीपावाओ, जाफराबाद, दमन-द्वीप इन सभी जगह पर जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ने वाले हैं मुझे बताया गया है। कि सरकार की तैयारी आने वाले वर्षों में इस ferry service को सूरत से आगे हजीरा और फिर मुंबई तक ले जाने के लिए भी चल रही है। कच्‍छ की खाड़ी में भी इसी तरह का project शुरू किए जाने की चर्चा अभी प्राथमिक स्‍तर पर चल रही है। मुझे बताया गया है। कि कच्‍छ के वायु और जामनगर के rozi बंदर के बीच ऐसी सेवा शुरू करने के लिए pre-feasibilty report already तैयार हो चुकी है। इतना ही नहीं जब ferry service का इस्‍तेमाल बढ़ेगा तो तमाम उद्योगों को नर्मदा नदी के माध्‍यम से भी connect किया जा सकता है।
  • साथियों, भारत की विशाल समुद्री सीमा 7500 किलोमीटर लंबी है। निवेश की बड़ी संभावनाओं से भरी हुई है। मेरा मानना रहा है कि हमारे समुद्री तट देश की प्रगति के gateway हैं। भारत की समृद्धि के प्रवेश द्वार हमारे बंदर होते हैं। लेकिन बीते दशकों में केंद्रीय स्‍तर से इन पर कम ही ध्‍यान दिया गया। देश का shipping और port sector भी लंबे समय तक उपेक्षित रहा। इस sector को सुधारने के लिए उसे आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने सागरमाला कार्यक्रम भी शुरू किया है।
  • सागरमाला परियोजना के तहत देश में मौजूदा ports उसका modernization और नये पोर्ट के development का काम किया जा रहा है। सड़क रेलमार्ग Interstate-Waterways और Coastal Transport को integrated किया जा रहा है। ये परियोजना Coastal Transport के जरिये माल ढुलाई को बढ़ाने में बहुत अहम भूमिका निभा रही है।
  • साथियों, सरकार के प्रयासों का ये नतीजा है कि पिछले तीन वर्षों में Port Sector में बहुत बड़ा परिवर्तन आया है। और अभी तक का सबसे ज्‍यादा capacity addition पिछले दो या तीन वर्ष में हुआ है। जो port और सरकारी कंपनिया घाटे में चल रही थी, उनमें भी परिस्थिति बदल रही है। सरकार का ध्‍यान coastal service से जुड़ी skill development पर भी है। एक अनुमान के मुताबिक अकेले सागरमाला project से आने वाले समय में एक करोड़ जितनी नई नौकरियों के हिन्‍दुस्‍तान में अवसर पैदा हो सकते हैं। हम इस approach के साथ काम कर रहे हैं कि transportation का पूरा framework आधुनिक और integrated हो।
  • हमारे देश में transport नीतियों में जो असंतुलन था, उसे भी दूर किया जा रहा है। ये असंतुलन इतना ज्‍यादा था वो आप इसी से समझ सकते हैं कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी हमारे यहां सिर्फ पांच National Waterways थे। water transport में इतना सस्‍ता होना और देश की नदियों का जल होने का बावजूद इसे नजरअंदाज कर दिया गया। अब इस सरकार ने 106 National Waterways का गठन किया गया है। और इस पर तेजी से काम चल रहा है। इस National Waterways की कुल लंबाई 17000 किलोमीटर से भी ज्‍यादा है। ये Waterways देश के transport sector देश के असंतुलन को देर करने में बहुत मददगार साबित हुई है।
  • हमारी सामुद्रिक संपदा हमारे ग्रामीण और समुद्री तट को एक नया आयाम दे सकती है। मछुआरे भाई इस संपदा का पूरा इस्‍तेमाल कर पाएं इसके लिए सरकार ने Blue Revolution Scheme को शुरू किया है। उन्‍हें आधुनिक तकनीक का इस्‍तेमाल करते हुए मछली पकड़ने और मछली पालन में value-addition के बारे में सिखाया जा रहा है।
  • Blue Revolution Scheme के अंतर्गत आज मछुआरों को Longliner trollers के लिए आर्थिक मदद देने की भी योजना बनाई है। एक vessel पर केंद्र सरकार की तरफ से चालीस लाख रूपये की सब्सिडी दी जाएगी। Longliner trollers का ने सिर्फ मछुआरों की जिंदगी आसान बनाएगें बल्कि वो उनके कारोबार को भी नई आर्थिक मजबूती देंगे। अभी जिस तरह ये trollers का इस्‍तेमाल किया जाता है, वो कम पानी में मछली पकड़ने के काम आते हैं। तकनीक के मामले में भी ये बहुत पुराने हैं risky हैं। इसलिए जब इन पुराने trollers को लेकर के वे समुद्र जाते हैं तो अक्‍सर रास्‍ता भटक जाते हैं। उन्‍हीं पता तक नहीं चलता कि भारत की समुद्री सीमा छोड़कर, दूसरे देश की समुद्र सीमा में पहुंच गये। इसके बाद मछुआरों को कई तरह की दिक्‍कत उठानी पड़ती है। तकनीक का ज्‍यादा से ज्‍यादा इस्‍तेमाल करके हम इन दिक्‍कतों को कम कर सकते हैं और इसलिए हमने ये Longliner trollers की मदद से मछुआरे भाई समुद्र में सही दिशा में दूर तक गहरे पानी में मछली पकड़ने के लिए जा सके इसके सरकार मदद करने की योजना बनाई है। आधु‍निक Longliner trollers ईंधन के मामले में भी काफी किफायती होते हैं। यानि मछुआरों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ उनका व्‍यापार और मुनाफा दोनों बढ़ाएगें।
  • साथियों देश में infrastructure का विकास हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। पिछले तीन वर्षों में Highways, Railways, Waterways और Airways पर जितना निवेश किया गया है। उतना पहले इतने कम समय में कभी नहीं हुआ। इसके अलावा नई Aviation Policy बनाकर Regional Air Service को सुधारा जा रहा है। छोटे-छोटे हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। कुछ हफते पहले ही अहमदाबाद से मुंबई के बीच चलने वाली देश की पहली बुलेट ट्रेन का भी काम शुरू किया जा चुका है। ये सारे प्रयास देश को इक्‍सवीं सदी के transport system देने का आधार बनेगें। एक ऐसा transport system जो New India की आवश्‍यकता हो New India की उम्‍मीदों के मुताबिक। साथियों आज यहां Ghogha से मैं ferry के माध्‍यम से ही दहेज़ तक जाऊंगा। मेरे साथ मेरे कुछ नन्‍हें साथी, दिव्‍यांग बच्‍चे भी होंगे। उनके चेहरे की खुशी ही मेरा पारिश्रमिक होगा।
  • भाईयो-बहनों, से बचपन से जिस कार्य का सपना देखा था, वो पूरा होने के बाद मैंने ऐसा अनुभव किया इसकी कल्‍पना शायद कोई नहीं कर सकता है। बचपन में जिस बात को सुना था और हो नहीं रहा था, आज जब अपनी आंखों के सामने देख पर रहा हूं और खुद को उस काम को करने का मौका मिला, मैं समझता हूं कि मेरे जीवन का बहुत धन्य पल है। मैं इसे अपना सौभाग्‍य मानता हूं। दहेज मैं जाऊंगा अपने अनुभव वहां बाटूंगा। लेकिन मैं आज आपसे आग्रह करूंगा कि इस महत्‍वपूर्ण काम में आप हमारे साथ जुडि़ए और ये मानिए ये ferry service तो शुरूआत है, ये पहला चरण है। बाद में प्राइवेट कंपनिया आएंगी ढेर सारी फेरिया चलेंगी। रूट चलेंगे, tourism development होगा। और सूरत के हमारे धनी लोग इसको हम hire करके जन्‍म दिन मनाने के लिए भी समुद्र में जाएंगे। बहुत बड़ी विकास की संभावनाए हैं। और इसलिए मैंने कहा कि घोघा का भाग्‍य फिर एक बार बदलने वाला है। घोघा का भाग्‍य फिर एक बार बदल रहा है। और एक बार फिर आप सभी को Ghogha-Dahej Ro-Ro ferry service और सर्वोत्‍त्‍म डेयरी के cattle freed plant के लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आप सबको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूं।भारत माता की जय,भारत माता की जय, जय वीर मोखरा जी दादा जय वीर मोखरा जी दादा जय वीर मोखरा जी दादा

About Sanjay Trivedi

Sanjay Trivedi is honorary editor of Asia Times. He is senior Indian Journalist having vast experience of 25 years. He worked in Janmabhoomi, Vyapar, Divya Bhaskar etc. newspapers and TV9 Channel as well as www.news4education.com. He also served as Media Officer in Gujarat Technological University.

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